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कोटा में दो प्रसूताओं की मौत के बाद एक्शन, 6 दवाओं पर रोक, क्या जांच में खुलेगा राज?

राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और एक अन्य प्रसूता की तबीयत बिगड़ने के मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले में अस्पताल प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में मौतों के संभावित कारणों के रूप में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, कुपोषण और प्रसव के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग का उल्लेख किया है. वहीं, दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए ड्रग विभाग ने इंजेक्शन समेत छह दवाओं के सैंपल लेकर जांच शुरू की है. संबंधित बैच की दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है.
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि प्रसूताओं की मौत का सीधा संबंध इन दवाओं से था या नहीं. ऐसे में जांच रिपोर्ट को इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है. अस्पताल में सामने आए इन मामलों के बाद प्रसूताओं को दिए गए उपचार, इस्तेमाल की गई दवाओं और उनकी मेडिकल हिस्ट्री की जांच की जा रही है. अस्पताल प्रशासन की रिपोर्ट में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद होने वाली जटिलताओं को संभावित कारण बताया गया है. वहीं दूसरी ओर दवाओं के सैंपल की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संबंधित इंजेक्शन या अन्य दवाओं की गुणवत्ता में कोई कमी तो नहीं थी.
रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रसूता की हालत इंजेक्शन लगाने के बाद बिगड़ने लगी थी. उसे कंपकंपी छूटने लगी और इसके बाद उसकी स्थिति लगातार गंभीर होती चली गई. उपचार के दौरान खून का थक्का जमने की क्षमता प्रभावित होने की बात भी सामने आई. शुरुआती जांच और सोनोग्राफी में स्थिति सामान्य बताई गई थी, लेकिन रात के समय ब्लड प्रेशर बढ़ने और पुरानी मेडिकल हिस्ट्री सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया. प्रसूता की हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उसे बचाने के लिए दोबारा ऑपरेशन किया. ब्लीडिंग रोकने के लिए दवाएं दी गई और अन्य जरूरी उपचार भी किए गए. इसके बावजूद चिकित्सक उसे बचाने में सफल नहीं हो सके. इस के बाद इलाज के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं और प्रसूता की स्थिति को लेकर जांच की जरूरत महसूस की गई.
छह दवाओं के सैंपल लेकर जांच, संबंधित बैच के इस्तेमाल पर रोक
मामले में ड्रग विभाग ने इंजेक्शन समेत छह दवाओं के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच शुरू की है. रिपोर्ट में संबंधित बैच की दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई है. जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दवाओं की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं. हालांकि, सैंपल की जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने से पहले दवाओं को प्रसूताओं की मौत का जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा. इससे पहले भी दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे. उस समय दवाओं को मौत का कारण मानने के लिए ठोस सबूत सामने नहीं आने की बात कही गई थी. अब नए मामलों के बाद दवाओं की गुणवत्ता और उपचार के दौरान सामने आई जटिलताओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं.
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौतों की असली वजह
न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामने आए इन मामलों ने प्रसूताओं की सुरक्षा, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के प्रबंधन और इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. अस्पताल प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में कुपोषण, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और अत्यधिक ब्लीडिंग जैसे संभावित कारणों का उल्लेख किया है, लेकिन मौतों की वास्तविक वजह का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा. अब ड्रग विभाग की जांच रिपोर्ट के साथ संबंधित प्रसूताओं के मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार के दौरान की स्थिति और दवाओं के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारियां महत्वपूर्ण होंगी. जांच में जो भी सामने आएंगे उससे स्पष्ट हो सकेगा कि इन घटनाओं के पीछे प्रसव संबंधी जटिलताएं जिम्मेदार थीं, दवाओं की गुणवत्ता में कोई कमी थी या अन्य चिकित्सकीय कारणों की भूमिका रही.