संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए AI, उपग्रह निगरानी और ऑटोमेटेड सिस्टम्स के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया है. भारत ने समुद्री रास्तों पर व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है. भारत ने कहा कि समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और नाविकों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं. UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत की प्राथमिकताओं को बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. हालांकि, उन्होंने नई तकनीकों के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई.
भारत ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में समुद्री सुरक्षा के लिए 5 प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया. इनमें समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना, AI और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के माध्यम से समुद्री गतिविधियों की निगरानी करना, बंदरगाहों और जहाजों को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना, समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण कम्यूनिकेशन सिस्टम की सुरक्षा करना तथा विकासशील देशों को नई तकनीकों तक समान पहुंच उपलब्ध कराना शामिल है. भारत ने कहा कि समुद्री सुरक्षा के लिए तकनीकी क्षमताओं का विकास जरूरी है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल जिम्मेदारी से किया जाए और उनका लाभ सभी देशों को मिले.
जहाजों को निशाना बनाने की निंदा
भारत ने लाल सागर सहित दुनिया के प्रमुख समुद्री रास्तों और चोक पॉइंट्स पर व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं की कड़ी निंदा की. पी. हरीश ने कहा कि ऐसे हमलों का असर केवल संबंधित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है. भारत के मुताबिक, समुद्री मार्गों पर हमलों से नाविकों की जान खतरे में पड़ती है, जहाजों की आवाजाही बाधित होती है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है. इसके कारण सामान की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. विकासशील देशों को ऐसे व्यवधानों का सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है.
भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्र में आवाजाही की स्वतंत्रता, व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित यात्रा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया. भारत ने अपने ‘सागर’ (SAGAR) यानी ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए समुद्री सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई. उसने कहा कि समुद्री सुरक्षा के लिए देशों के बीच सहयोग, तकनीकी साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन आवश्यक है. भारत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं तथा इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं.
